UP Unaided Secondary Teachers Salary Update: उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा हाल ही में उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्र और अनुदेशक के मानदेय में भारी बढ़ोतरी कर दिया गया है। अब राज्य सरकार के द्वारा जितने भी वित्तविहीन स्कूल है यहां पर पढ़ने वाले शिक्षकों का मानदेय बढ़ाए जाने की दिशा में फिर से एक बड़ा कदम उठाए जाने की तैयारी चल रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत नई नियमावली को तैयार किए जाने का कार्य किया जा रहा है और नई शर्तों के साथ उनके मानदेय को निर्धारित किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को नियमावली के आधार पर शिक्षकों को मानदेय प्रदान करना होगा। प्रदेश भर में 30000 से अधिक वित्त माध्यमिक स्कूल इस समय संचालित हो रहे हैं। जिसमें अंशकालिक शिक्षक पढ़ने का कार्य कर रहे है। नियमावली बनाये जाने हेतु सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में एक गठित कमेटी को गठित कर दिया गया है। कमेटी एक महीने में अपना रिपोर्ट देगा और नियमावली जारी हो जाने के बाद वित्त माध्यमिक शिक्षकों को न्यूनतम वेतन दिए जाने का पूरा रास्ता साफ हो सकेगा।
यूपी के 4 लाख वित्तविहीन शिक्षकों को मिली बड़ी राहत
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत बात किया जाए तो 80% भागीदारी इन शिक्षकों की रहती है। विधानमंडल में इनका मानदेय का मामला पहले कई बार उठ चुका है। लेकिन इस पर सरकार के माध्यम से कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद हमेशा कार्रवाई किए जाने की बात कहा गया था। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षक काफी लंबे समय से मांग करते चले आ रहे हैं। और नियमावली मजबूत तरीके से बनाए जाने की शिक्षकों को सम्मान जनक ताकि मानदेय मिल पाए और फिलहाल अब नयी नियमावली को अंतिम रूप दिया जाने वाला है और जल्द ही इन चार लाख अंशकालिक शिक्षकों को काफी बड़ी राहत मिल सकता है।
अंशकालिक शिक्षकों का न्यूनतम मजदूरी से कम दिया जाता है मानदेय
वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों में जितने भी अंशकालिक शिक्षक हैं उनकी सेवा शर्तें पुरानी ही चल रहा है यह सेवा शर्तों 10 अगस्त 2001 को जारी शासनादेश के आधार पर निर्धारित कर दिया गया था। इसके आधार पर स्कूल प्रबंधन को अपने संसाधनों के आधार पर शिक्षकों को वेतन देना पड़ता है। यह भुगतान संपूर्ण शिक्षण सत्र हेतु नियमित रूप से रहता है। इसका लेखा-जोखा रहता है। इसके अंतर्गत शिक्षकों को मजदूरी अधिनियम में कुशल श्रमिक हेतु निर्धारित किया गया न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय नहीं दिया जाएगा। इसके साथ-साथ भविष्य निधि व बीमा जीवन की सुविधा इन शिक्षकों को मिलेगा। इसके बाद भी विद्यालयों में शासनादेश का पालन नहीं हो रहा है। इन स्कूल के शिक्षकों को ₹5000 ही मानदेय दिया जाता है जो कि न्यूनतम मजदूरी के बराबर भी इनका मानदेय नहीं मिलता।
वित्तविहीन शिक्षकों हेतु बनेगी नयी नियमावली
उत्तर प्रदेश में कुल 22000 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय वर्तमान में है जिसमें चार लाख से अधिक शिक्षक वर्तमान में कह रहा था। शासन के द्वारा इन शिक्षकों हेतु सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया जो कि वित्त एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों हेतु नई सेवा नियमावली का मसौदा पूरी तरीके से तैयार करेगा। 15 दिनों के भीतर समिति को अपना रिपोर्ट देना पड़ेगा। इसके साथ ही समिति वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता से संबंधित जो नियमावली इसमें संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा लंबे समय के बाद इन शिक्षकों को बाद राहत की उम्मीद जगी है काफी कम मानदेय में शिक्षक शिक्षक का कार्य वर्तमान में कर रहे हैं और नई नियमावली लागू होने के बाद न्यूनतम मानदेय मिलने की राह काफी आसान हो जाएगा।
